डेनमार्क से कैनरी द्वीप समूह तक फैले पवन ऊर्जा संयंत्रों में टर्बाइन के ब्लेड एक ऐसे दुश्मन का सामना करते हैं, जिसकी शायद ही उम्मीद की जाए: बारिश। उनके सिरे 360 km/h की रफ्तार तक पहुंच सकते हैं और इतनी रफ्तार पर बारिश की बूंदें धीरे-धीरे ब्लेड के अगले किनारे को घिस सकती हैं। घिसे हुए ब्लेड कम बिजली पैदा करते हैं, जबकि यूरोप स्वच्छ ऊर्जा के लिए पवन ऊर्जा पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहा है।

सिर्फ बारिश ही जिम्मेदार नहीं है। रेत और ओले भी ब्लेड की सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि कटाव होने की आशंका सबसे ज्यादा कहां है और इसे कैसे सीमित किया जा सकता है।

स्पेन के नवारा प्रांत के सारिगुरेन में स्थित राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र (CENER) की पवन ऊर्जा शोधकर्ता डॉ बीट्रिज़ मेंडेज़ लोपेज़ इस चुनौती से निपटने में उद्योग और अकादमिक जगत, दोनों का अनुभव लेकर आई हैं।

इंजीनियरिंग और कम्प्यूटेशनल फ्लुइड मैकेनिक्स में प्रशिक्षित मेंडेज़ ने 2011 में CENER से जुड़ने से पहले स्पेन के पवन ऊर्जा और वैमानिकी उद्योगों में काम किया था। अब वह यूरोपीय संघ (EU) के वित्तपोषण वाली पहल AIRE का समन्वय करती हैं, जो यह जांच रही है कि मौसम टर्बाइन के प्रदर्शन और टिकाऊपन को कैसे प्रभावित करता है।

इसका महत्व बहुत बड़ा है। 2025 में EU की नवीकरणीय बिजली का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा पवन ऊर्जा से पैदा हुआ था। भविष्य को देखते हुए यूरोपीय आयोग का अनुमान है कि 2050 तक पवन ऊर्जा EU की बिजली मांग का 40% से अधिक पूरा करेगी। वहां तक पहुंचने के लिए ऐसे बड़े टर्बाइनों का इस्तेमाल करना होगा जो वायुमंडल में अधिक ऊंचाई तक पहुंचें। साथ ही जमीन और समुद्र, दोनों जगह अधिक चुनौतीपूर्ण स्थलों की संभावना तलाशनी होगी।

मेंडेज़ ने कहा, “भविष्य में EU के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हमें कहीं अधिक पवन ऊर्जा की जरूरत होगी। हमें पवन टर्बाइनों को यथासंभव दक्ष बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अलग-अलग जगहों पर प्रभावी ढंग से काम कर सकें।”

“भविष्य में EU के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हमें कहीं अधिक पवन ऊर्जा की जरूरत होगी।” डॉ बीट्रिज़ मेंडेज़, AIRE

हर देश का ऊर्जा मिश्रण अलग होता है, इसलिए कुछ देशों में पवन ऊर्जा अन्य देशों से अधिक महत्वपूर्ण है। AIRE टीम की सदस्य आस्ता हानेसदोत्तिर, रोस्किल्डे में डेनमार्क तकनीकी विश्वविद्यालय के रिसो परिसर में पवन और ऊर्जा प्रणालियों पर शोध करती हैं। वह इस अंतर को अपने अनुभव से जानती हैं: उनके मूल देश आइसलैंड में जलविद्युत और भू-तापीय ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।

“लेकिन डेनमार्क जैसी कुछ जगहों पर, जहां जलविद्युत लगभग नहीं है, पवन ऊर्जा बेहद जरूरी है।”

हवा की रफ्तार से आगे

डेवलपरों को जगह चुनने और अधिक प्रभावी पवन ऊर्जा संयंत्रों की रूपरेखा बनाने में मदद करने के लिए AIRE टीम केवल हवा की रफ्तार से आगे जाकर अध्ययन कर रही है। शोधकर्ता पवन ऊर्जा संयंत्रों में लिए गए मापों का इस्तेमाल करके उन मॉडलों को बेहतर बना रहे हैं जो बताते हैं कि वास्तविक परिस्थितियों में टर्बाइन कैसा प्रदर्शन करते हैं। इसमें आधुनिक टर्बाइनों की ऊंचाई पर मिलने वाली बारिश, रेत और हवा की स्थितियों को ध्यान में रखा जा रहा है।

वे मॉडल बनाकर समझ रहे हैं कि ब्लेड में कटाव कैसे बढ़ता है और इसकी वजह से संचालकों को कितनी बिजली का नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी जांच की है कि भारी बारिश के दौरान टर्बाइनों की रफ्तार कम करने से नुकसान कैसे घट सकता है। इसके साथ ही वे ऐसे आकार के ब्लेड विकसित कर रहे हैं जिन्हें कठोर मौसम झेलने के लिए तैयार किया गया है।

मेंडेज़ ने कहा, “परियोजना का उद्देश्य यह बेहतर ढंग से समझना है कि वास्तविक मौसमी परिस्थितियों में पवन टर्बाइन कैसे काम करते हैं।”

इस टीम में 6 देशों के 11 विश्वविद्यालय, कंपनियां और अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र शामिल हैं। अलग-अलग देशों में काम करने से शोधकर्ताओं को तुलना के लिए कई तरह की परिस्थितियां मिलती हैं। इनमें डेनमार्क और ब्रिटेन से लेकर कैनरी द्वीप समूह तक जमीन और समुद्र में स्थित स्थल शामिल हैं।

बारिश से होने वाली परेशानी

वर्षण को समझना खास तौर पर चुनौतीपूर्ण है। टीम ने जमीन से लगभग 3 km तक की ऊंचाई पर इसका मापन किया है। उन्होंने दर्ज किया कि क्या गिरता है, बूंदें या कण कितने बड़े हैं और वे कितनी तेजी से गिरते हैं।

मेंडेज़ ने कहा, “हमने जाना है कि वर्षण के प्रभाव जटिल होते हैं और अभी भी बहुत कुछ समझना बाकी है। हवा के साथ इसका संबंध हमेशा सीधा नहीं होता: बारिश का मतलब यह जरूरी नहीं कि तेज हवा भी चले, और इसका उलटा भी सही नहीं है। प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि भूभाग समतल है या अधिक जटिल।”

हानेसदोत्तिर ने कहा कि बारिश के प्रभावों को मापना और उनका सिमुलेशन करना भी मुश्किल है। “हम 2 उपकरणों को एक-दूसरे के पास रख सकते हैं और फिर भी उनसे अलग-अलग माप मिल सकते हैं। हवा के मामले में आम तौर पर ऐसा नहीं होता।”

शोधकर्ता नुकसान सीमित करने के व्यावहारिक तरीके तलाश रहे हैं। एक तरीका भारी बारिश के दौरान ब्लेड की रफ्तार घटाना है, जब कटाव का खतरा अधिक होता है। इससे थोड़े समय के लिए बिजली उत्पादन कम होता है, लेकिन घिसाव घटाने से ब्लेड लंबे समय तक चल सकते हैं और समय के साथ अपना प्रदर्शन बनाए रख सकते हैं।

टीम ने ब्लेड के नए आकार भी तैयार किए हैं, जिनका उद्देश्य मौसम से होने वाले नुकसान के प्रति उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना है।

पवन उद्योग के साथ मिलकर बनाए गए साधन

AIRE टीम ने अपने मॉडलों और आंकड़ों को एक ऑनलाइन टूलबॉक्स में एक साथ उपलब्ध कराया है। इससे अन्य शोधकर्ताओं और पवन उद्योग को खतरों का आकलन करने तथा टर्बाइनों की रूपरेखा और संचालन बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

इन संसाधनों में ब्लेड के कटाव के खतरे का एक एटलस शामिल है, जो पूरे यूरोप में बारिश से कटाव के मॉडल-आधारित खतरे को दिखाता है। बारिश और रेत जैसी परिस्थितियों में पवन ऊर्जा संयंत्रों की योजना बनाने का एक सहायक साधन भी है। इसके अलावा ऐसे मॉडल हैं जो अनुमान लगाते हैं कि ब्लेड घिसने पर टर्बाइनों से कितनी बिजली का नुकसान हो सकता है।

यह टूलबॉक्स ओपन सोर्स है, यानी कोई भी इसका इस्तेमाल कर सकता है और इसे अपनी जरूरत के अनुसार ढाल सकता है।

हानेसदोत्तिर ने कहा, “हमें उम्मीद है कि AIRE टूलबॉक्स एक स्थायी संसाधन साबित होगा, जिसका शोधकर्ता और उद्योग इस्तेमाल कर सकेंगे, जिसकी पुष्टि कर सकेंगे और जिसे आगे विकसित करके पवन ऊर्जा की विश्वसनीयता बेहतर बना सकेंगे।”

“डेनमार्क जैसी कुछ जगहों पर, जहां जलविद्युत लगभग नहीं है, पवन ऊर्जा बेहद जरूरी है।” आस्ता हानेसदोत्तिर, AIRE

इन संसाधनों को औद्योगिक साझेदारों के साथ करीबी सहयोग से विकसित किया गया है। इनमें सीमेंस गेमेसा रिन्यूएबल एनर्जी का डेनमार्क प्रभाग, स्पेन की कैपिटल एनर्जी और फ्रांस की एंजी शामिल हैं।

मेंडेज़ ने कहा, “उन्होंने साधनों को तैयार किए जाने के दौरान उनकी जांच की और डेवलपरों को अपनी प्रतिक्रिया भेजी। इन मॉडलों के इस्तेमाल से अनिश्चितता और लागत कम तथा बिजली उत्पादन अधिक होना चाहिए। इससे ब्लेड निर्माताओं और पवन ऊर्जा संयंत्र संचालकों को अपनी रूपरेखा और संचालन बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।”

ज्ञान साझा करना

AIRE का शोध पवन ऊर्जा के पूर्वानुमान और टर्बाइन की रूपरेखा बेहतर बनाने की व्यापक यूरोपीय कोशिश का हिस्सा है। इसके साथ EU के वित्तपोषण वाली 2 अन्य पहलें, FLOW और MERIDIONAL भी काम कर रही हैं। इनके शोधकर्ता भी ऐसे मॉडल और तरीके विकसित कर रहे हैं जो अनुमान लगा सकें कि पवन ऊर्जा संयंत्र कितनी बिजली पैदा करेंगे और उन पर कितना दबाव पड़ेगा।

तीनों टीमों ने मिलकर WindLab में योगदान दिया है। यह सभी के लिए सुलभ ऑनलाइन ज्ञान और आंकड़ा केंद्र है, जिसमें कोई भी खोज कर सकता है और इसका इस्तेमाल कर सकता है। फिलहाल इसमें योगदान देने वाले 27 संगठनों के 1 100 से अधिक डेटासेट हैं। ये मापों और कंप्यूटर सिमुलेशन के संग्रह हैं।

इन आंकड़ों में हवा, बारिश और ब्लेड की स्थिति के माप से लेकर वायुमंडल के कंप्यूटर सिमुलेशन तक सब कुछ शामिल है। इनमें जमीन और समुद्र में लगे टर्बाइनों के साथ-साथ पतंग जैसी हवा में उड़ने वाली प्रणालियों की जानकारी भी है।

मेंडेज़ के लिए दीर्घकालीन लक्ष्य पवन ऊर्जा उत्पादन को अधिक पूर्वानुमान योग्य और कम जोखिम भरा बनाना है।

उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि AIRE की विरासत के रूप में किसी स्थल की पवन ऊर्जा क्षमता और वहां मौसम से जुड़ी चुनौतियों की बेहतर समझ मिलेगी, जिससे भविष्य की परियोजनाओं के वित्तीय जोखिम कम करने में मदद मिलेगी। अधिक विश्वसनीय पवन ऊर्जा से ऊर्जा की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी और नवीकरणीय ऊर्जा को व्यवस्था में शामिल करना आसान होगा।”

हानेसदोत्तिर के लिए उद्देश्य स्पष्ट है। “हम यह दिखाना चाहते हैं कि व्यावहारिक ओपन-सोर्स साधनों के जरिए कटाव का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है और उसे सक्रिय रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।”

जैसे-जैसे टर्बाइन बड़े होते जा रहे हैं और उन्हें अधिक चुनौतीपूर्ण जगहों पर लगाया जा रहा है, उन्हें वायुमंडल की कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। हवा और मौसम की समझ बेहतर बनाकर शोधकर्ता टर्बाइनों को सामने आने वाली परिस्थितियां झेलने और यूरोप के लिए जरूरी स्वच्छ बिजली का उत्पादन जारी रखने में मदद करने की उम्मीद कर रहे हैं।

इस लेख में बताए गए शोध को EU के होराइजन कार्यक्रम से वित्तीय सहायता मिली थी। साक्षात्कार देने वालों के विचार जरूरी नहीं कि यूरोपीय आयोग के विचारों को दर्शाते हों। अगर आपको यह लेख पसंद आया हो, तो कृपया इसे सोशल मीडिया पर साझा करने पर विचार करें।